मैं टूटे हैंडल सी 

17264374_1872525506370062_7219819238069447607_n
मैं टूटे हैंडल सी 
दुनिया की नज़रो मैं नकारी गई
फिर भी जीवन जीती हूँ
और तमाम दुखों को सहती हूँ|
***
मन में एक आशा लिए की
पता नहीं जीवान में कब
दुखों की रात को चिरती हुई
खुशीयों की रौशनी आयेगी
और देखते देखते सब बदल जयेगी…
फिर से मेरे वजुद को दुनिया पहचानेगी
और मेरा जीवान में
फिर से खुशियाँ लहलहाएंगी|
***
मैं टूटे हैंडल सी
दुनिया की नज़रो मैं नकारी गई
फिर भी जीवन जीती हूँ
और तमाम दुखों को सहती हूँ|
ऋषिका सृजन

–XxXxX–

©All Rights Reserved
© Rishika Ghai

image courtesy google

Advertisements