वाह रे दुनिया

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कहने को तो दुनिया
बदल रही हैं
हर पल हर वक्त
पर अपनों को ही अपनों से
दूर कर रही है|

पहले का दौर भी
क्या हसीन हुआ करता था
सब एक साथ
हँसते- गूनगुनाते, खाते-पीते थे
साथ बात–चीत करके दुःख-सुख बाँटते थे|

पर आज के
बदलते दौर ने
यह सब खुशियाँ छीन ली है
अब लोग एक साथ रह कर
भी एक साथ नहीं होते|

इस बदलाव का कारण कुछ और नहीं
बल्कि प्रोधोगिकी है
जहाँ इसने जीवन जीने का
ज़रिया आसन बनाया है
वहीं अपनो को अपनो से अलग कर दिखाया है|

आज कल परिवार के साथ कम
और गैजेट के साथ ज़्यादा
समय व्यतीत करते है
ये इन्सान की मुर्खता ही तो है
जो  इसे जीवन जीने का ज़रिया बनाता जा रहा है|

वह दिन दूर नही
जब परिवार और रिश्ते- नातो
का कोइ मोल न रह जायेग
और सब बस प्रोधोगिकरण
के गुलाम बनकर रह जाएगे|

अब भी वक्त है
रोक लो अपने आप को
नही तो तरसते रह जाओगे
परिवार और प्यार की खातिर
वक्त जो बीत जायेग वह फिर कभी लौट के न आएगा|

ऋषिका सृजन 

–XxXxX–

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© Rishika Ghai

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