वाह रे दुनिया

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कहने को तो दुनिया
बदल रही हैं
हर पल हर वक्त
पर अपनों को ही अपनों से
दूर कर रही है|

पहले का दौर भी
क्या हसीन हुआ करता था
सब एक साथ
हँसते- गूनगुनाते, खाते-पीते थे
साथ बात–चीत करके दुःख-सुख बाँटते थे|

पर आज के
बदलते दौर ने
यह सब खुशियाँ छीन ली है
अब लोग एक साथ रह कर
भी एक साथ नहीं होते|

इस बदलाव का कारण कुछ और नहीं
बल्कि प्रोधोगिकी है
जहाँ इसने जीवन जीने का
ज़रिया आसन बनाया है
वहीं अपनो को अपनो से अलग कर दिखाया है|

आज कल परिवार के साथ कम
और गैजेट के साथ ज़्यादा
समय व्यतीत करते है
ये इन्सान की मुर्खता ही तो है
जो  इसे जीवन जीने का ज़रिया बनाता जा रहा है|

वह दिन दूर नही
जब परिवार और रिश्ते- नातो
का कोइ मोल न रह जायेग
और सब बस प्रोधोगिकरण
के गुलाम बनकर रह जाएगे|

अब भी वक्त है
रोक लो अपने आप को
नही तो तरसते रह जाओगे
परिवार और प्यार की खातिर
वक्त जो बीत जायेग वह फिर कभी लौट के न आएगा|

ऋषिका सृजन 

–XxXxX–

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माँ की ममता

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माँ आपके बिना मेरा अस्तित्व अधुरा है
आप मेरे लिए ईश्वर का दूसरा रूप हो
आप ममता और करुणा का सागर हो|
***

मेरी खुशियों के खातिर आपने
रातो की नींद गवाई
मुझे अपनी जान से भी जयादा प्यार दिया|
***

मेरी एक आवाज़ पर आप दौड़ी चली आती हो
ज़िन्दगी के हर पल मुझे आगे
बढने की राह दिखती हो|
***

माँ आप हो तो मैं हूँ
आपकी ममता का क़र्ज़
मैं ज़िन्दगी भर चूका न पाऊगी|
***

मेरी भगवान से प्राथना है कि
इस तरह आपके आशीर्वाद का हाथ
मेरे सिर पर रहे|

ऋषिका सृजन 

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I Love You Mummy

 

 

–XxXxX–

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मेरी नानी, मेरी जान

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दुनिया में माँ से बढ़कर
कोई नहीं होता
पर मेरे लिए मेरी पूरी दुनिया
मेरी नानीमाँ है
जितना प्यार माँ से करती हूँ
उससे कहीं ज्यादा नानीमाँ से करती हूँ|

कहते है माँ का स्थान सबसे ऊँचा होता है
पर मेरे जीवन में वह स्थान
नानीमाँ को प्राप्त है
जीतना प्यार में उनसे करती हूँ
उतना ही वो भी मुझसे करती है|

नहीं तो कौन सी ऐसी नानी होगी
जो बूढ़ापे में अपनी नाती को
अपनी बेटी से बढ़कर प्यार दे
रात दिन उसकी सेवा करे
उसे पाल पोसकर जीवन के लिए तैयार करे |

जब-जब मुझे लगा में जीवन
के संधर्श में हार रही हूँ
तब-तब नानी मेरा सहारा और
मुसीबत से लड़ने की ताकत बनी
और मुसीबत का डट कर सामना किया|

मुझे हिंदी भाषा से डर लगता था
हरदम मै उससे दूर भागती थी
पर आज जो मैने हिंदी में बी.ए किया
और ढ़ेरो कविताएँ लिखी उसका
श्रेय मेरी नानी को जाता है|

मेरा जीवन आपके बिना अधुरा है
नानी, आप हो तो मैै हूँ
भगवान से मिली एक अमूल्य भेंट हो
आपका अस्तित्व सदैव मेरे जीवन का अटूट अंग रहेगा|  

ऋषिका सृजन 

–XxXxX–

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मैं टूटे हैंडल सी 

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मैं टूटे हैंडल सी 
दुनिया की नज़रो मैं नकारी गई
फिर भी जीवन जीती हूँ
और तमाम दुखों को सहती हूँ|
***
मन में एक आशा लिए की
पता नहीं जीवान में कब
दुखों की रात को चिरती हुई
खुशीयों की रौशनी आयेगी
और देखते देखते सब बदल जयेगी…
फिर से मेरे वजुद को दुनिया पहचानेगी
और मेरा जीवान में
फिर से खुशियाँ लहलहाएंगी|
***
मैं टूटे हैंडल सी
दुनिया की नज़रो मैं नकारी गई
फिर भी जीवन जीती हूँ
और तमाम दुखों को सहती हूँ|
ऋषिका सृजन

–XxXxX–

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मुस्कराहट

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मुस्कराहट भी कया
चहरे का गज़ब भाव है
ख़ुशी में मुस्कुराओ
तो दिल खिल जाता है|

यदि दुःख में मुस्कुरओ तो गम को
छिपाने का जरिया बन जाता है
और कभी तो मुस्कराहट इन्सान में छिपी
बुराइयों का आईना भी बन जाता है|

मुस्कुराहाट एक मामूली सा भाव है
पर हर परिस्तिथि में
इसका एक अलग रूप सामने आता है
बस इन्सान को इसे परखना आना चाहिए|

यदि सही परखा तो इन्सान को
इन्सान की फितरत का पता चलता है
क्योंकि मुस्कराहट ही तो वह जरिया है
जो बिना शब्दों के सब कुछ ब्याँ करती है|

ऋषिका सृजन 

–XxXxX–

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शक: एक लाइलाज बिमारी

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शक;
वह बीमारी है 
जो लोगो के जीवन को 
खोखला करती है|

यह एक ऐसा बीज है 
जो किसी भी व्यक्ति की 
बुद्धि में आसानी से उत्पन्न होता है 
और बढ़ता ही जाता है|

ज्यादा तर मुसीबतों की 
जड़ यह शक ही है
यह न हो तो 
आधी मुसीबत यु ही हल हो जाये|

मनुष्य को जीवन में 
शक और शक्की लोगो से 
सावधान रहना चाहिए
और सथ ही इनका परहेज़ करना चाहिए|

शक का तो मकसद ही है 
बनी बनाई बात को बिगाड़ना
और जीवन को एक झटके में नष्ट कर देना 
इसलिए शक मत करो, क्योकि जख्म का इलाज तो है पर शक का नहीं| 

ऋषिका सृजन 

–XxXxX–

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मेरा स्वर्ग आपके चरणों में

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ईश्वर;
कौन है?
इससे लोगो का तात्पर्य
एक चमत्कारी शक्ति से है|

वास्तव में कहे तो
माता-पिता ही ईश्वर है
क्योकि वो ही है हमारे इस संसार में आने की वजह
वो नहीं तो कुछ नहीं|

पिता भगवान है तो
तो माता के चरणों में स्वर्ग दिखता है
अगर सच्ची आस्था रखो तो
ये दोनों हमारे जीवन के एक म्ह्त्वपूण स्तम्भ है|

इन स्तम्भ के बिना
जीवन की कल्पना असंभव है
ये ही तो जीवन में आगे बढने का ज़रिया है
इनके गिरने से जीवन के सभी सपने चूर चूर हो जाते है|

खुशनसीब है वो
जिनके जीवन में
माता-पिता का साया है
क्योकि कुछ लोग तो बस कल्पना ही करते है|

माता-पिता ही तो
सुख-दुःख में आपका साथ देते है|
ये ही तो जीवन के
हर कष्टों का निवारण करते है|

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ऋषिका सृजन

–XxXxX–

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